
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
वर्धा में गो दुग्ध उत्पादक सहकारी संस्था द्वारा संचालित ‘गोरस भंडार’ पर अन्न व औषधि प्रशासन (FDA) ने 31 मई को अचानक छापा मारा था। इस कार्रवाई में करीब 25 लाख 86 हजार 168 रुपये का संदिग्ध और असुरक्षित दुग्ध उत्पादों का स्टॉक जब्त कर आस्थापना को तत्काल बंद करने के आदेश दिए गए थे।
गोरस भंडार ने इस कार्रवाई को मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तुकाराम मुंढे के विभाग द्वारा बिना नोटिस दिए सीधे कार्रवाई करने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा, “क्या हम भी बिना नोटिस दिए सीधे कार्रवाई कर दें?”
हाईकोर्ट ने यह भी सवाल किया कि “पिछले 70 साल में गोरस भंडार का कितनी बार निरीक्षण किया गया और कितनी बार अस्वच्छता पाई गई?”
800 परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट
वर्धा गो-दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने याचिका में बताया कि गोरस भंडार के माध्यम से रोजाना करीब 9 हजार लीटर दूध का संकलन और वितरण किया जाता है। वर्धा जिले के 15 गांवों के करीब 800 परिवारों का जीवनयापन इसी पर निर्भर है।
31 मई को विभाग ने गोरस भंडार का निरीक्षण किया और परिसर में स्वच्छता का अभाव बताते हुए ताला लगा दिया। साथ ही अगले आदेश तक दूध संकलन, बिक्री और दुग्ध उत्पादों का उत्पादन रोकने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि विभाग की इस कार्रवाई से किसानों और दूध उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है।
FDA का जवाब: जनता की सेहत के लिए की कार्रवाई
पिछले हफ्ते हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई का कारण स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किया था। इस पर अन्न व औषधि विभाग ने शपथपत्र दाखिल कर कोर्ट को बताया कि नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष हुई। आगे की सुनवाई जारी है।











